जीरो लोकगीत, मोरिया, फाग, गणगौर, तीज, पटेल्या , बीडियो एवं लालर, बीछुडो़, पंछीड़ा, घुड़ला, पीपली, कुरजाँ लोकगीत(ziro lokageet, moriya, phaag, ganagaur, teej, pateliya avm bideoavm lalar, vichuda, panchida, gudala, pipali, kurja lokageet)

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जीरो लोकगीत (ziro lokageet)

लोकगीत
लोकगीत

एक किसान की पत्नी अत्यधिक मेहनत के बाद जीरे के गाया जाने फसल में नुकसान होने पर दु : खी होकर अपने पति को सम्बोधित करते हुए जीरा नहीं बोने की विनती करती है । इस लोकगीत के बोल निम्न है
” ओ जीरो जीव रो बैरी रे , मत बावी म्हारा परण्या जीरो , पाणते करती रो पगल्या घिसे ग्या , कड़ली घिस ग्या चांदी रा

मोरिया ( मोरियो ) लोकगीत (moriya lokageet)

इस गीत में ऐसी तरुणी की व्यथा है जिसकी सगाई हो चुकी है लेकिन विवाह में देरी हो रही है ।

फाग लोकगीत– (phaag lokageet)

होली के अवसर पर महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला लोक गीत है ।

1.राजस्थान लोक संगीत लोकगीत एवं लोक वाघ – राजस्थानी शास्त्रीय संगीत (rajasthan shastriya sangit, rajasthani kavya guru ganpat, tok riyasat)

गणगौर लोकगीत— (ganagaur lokageet)

गणगौर के अवसर पर गाया जाने वाला गीत है । ।

तीज लोक गीत- (teej lokageet)

श्रावणी तीज के अवसर पर श्रावण मास की प्रकृति की । सौदर्य चित्रण करने वाले तीज गीतों का गान किया जाता है ।

1.फड या पड़ लोकनाट्य, लीलाएँ लोकनाट्य, कत्थक लोकनाट्य (phad ya pad loknatkya, leelaye loknatkya, kathak loknatkya)

पटेल्या , बीडियो एवं लालर लोक गीत – (pateliya avm bideoavm lalar lokageet)

राजस्थान के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रचलित लोक गीत है। ।

बीछुडो़ लोकगीत–(vichuda lokageet)

पंछीड़ा लोक गीत (panchida lokageet)

ढुँढाड़ व हाड़ौती क्षेत्र में मेलों के अवसर पर गाया जाने वाला गीत है ।

घुड़ला लोकगीत (gudala lokageet)

मारवाड़ क्षेत्र में प्रचलित लोक गीत जिसे कन्याओं के दीर्घायु । द्वारा घुड़ला त्यौहार के अवसर पर गाया जाता है ।

1.नौटंकी लोकनाट्य, स्वांग लोकनाट्य, भवाई लोकनाट्य, चारबैत लोकनाट्य (notanki loknatkya, svang locknatkiya, bhavai locknatakiya, charbet locknatkiya)

पीपली लोक गीत (pipali lokageet)

पुत्र जन्मोत्सव , तीज व चौमासा के दिनों में गाया जाने वाला लोक गीत । ।

कुरजाँ लोक गीत (kurja lokageet)

इस गीत में विरहिणी परदेस में बैठे अपनी पति को प्रवासी पक्षी कुरजाँ के माध्यम से संदेश पहुँचाती है ।

इसके बोल निम्न हैं

कुरजाँ ए म्हारी भंवर मिलादे ए |

1.गवरी लोकनाट्य, तमाशा लोकनाट्य (gavari locknatkiya, tamasha locknatkiya)


2.राजस्थान के लोकनाट्य – ख्याल लोकनाट्य, रम्मत लोकनाट्य (rajasthan ke locknatkiya – khyala locknatkiya, rammat locknatkiya)


3.संत चरणदास जी एवं चरणदासी पंथ, संत सहजोबाई, दया बाई, संत मावजी (sant charandas ji avm charandasi panth, sant sahajobai, daya bai, sant mavaji)


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