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नियमित टीकाकरण कार्यक्रम, niyamit tikakaran karyakram

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम
नियमित टीकाकरण कार्यक्रम

 अंतर्गत छः जानलेवा बीमारियों यथा -पोलियो, गलघोटू ,काली खाँसी, नवजात शिशु में धनुर्वात (टिटेनस) , खसरा बच्चों में होने वाले गंभीर प्रकार के रोग हैपेटाइटिस- बी एवं हिब (हीमोफीलस इनफ्लुएन्जा बी), निमोनिया, मस्तिष्क ज्वर से सुरक्षा प्रदान करने के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम टीके लगाए  जाते हैं

परिवार कल्याण (नसबंदी) कार्यक्रम (privar kalyan (nashbandi) karyakram)

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ (beti bchavo beti padhavo)

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के उद्देश्य, niyamit tikakaran karyakram ke udheshya

बच्चों का जानलेवा बीमारियों से बचाव एवं गर्भवती महिलाओं का टिटेनस से बचाव करना

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के लाभ

बच्चों को पोलियो ,गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, खसरा एवं क्षय रोग जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव करना गर्भवती महिलाओं को टीटी के टीके द्वारा टिटनेस से बचाव एवं हेपेटाइटिस – बी एवं (हिमोफिलस इनफ्लुएन्जा बी) से सुरक्षा निमोनिया एवं मस्तिष्क ज्वर से सुरक्षा के टीके लगाना एवं विटामिन ए का घोल पिलाना आवश्यक है

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की पात्रता

समस्त गर्भवती महिलाएं एवं समस्त 0 से 1 वर्ष शिशु तथा 1 से 16 वर्ष तक के बच्चे को टीका लगाना |

1.सुकन्या समृद्धि योजना (suknya samrdhi yojna)

2.राजीव गांधी किशोरी बालिका सशक्तिकरण योजना (rajiv gandhi kishori balika sshaktikarn yojna)

राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम, rashtriya kushta rog unmulan karyakram

वर्ष 1970-71 से कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रम क्रियान्वित किया जा रहा था जिसे वर्ष 1981-82 में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम नाम दिया गया

अमृता(SHG) पुरस्कार योजना (amarta(shg) purskar yojna)

राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के उद्देश्य

कुष्ठ रोगियों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना व सकर्मक की रोकथाम को रोकना नियमित उपचार द्वारा विकलांगता से बचाव विकृतियों का उपचार कर रोगियों को समाज का उपयोगी सदस्य प्राप्त रूप में बनाना स्वास्थ्य – शिक्षा द्वारा इस रोग के संबंध में फैली गलत अवधारणाओं को दूर करना

राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के लाभ

उपचार निःशुल्क में रोगी घर पर भी अपनी दिनचर्या के साथ उपचार ले सकता है

राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम की पात्रता

कुष्ठ रोगी

1.पुरालेखीय स्रोत – नेमिनाथ (आबू), चीरवे का शिलालेख, बीकानेर का शिलालेख (puralekhiy sarot – neminath – aabu, chirve ka shilalekh, bikaner shilalekh)


2.मुगल, राजपूताना के कार्य कलाप (mugal, rajputana ke kary klap)


3.सांस्कृतिक स्थापत्य एवं चित्रकला (sanskartik sthapatye avm chitrkala)


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