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(1.) केवलादेव अभ्यारण्य (करौली) – keoladeo rashtriya udyan bharatpur :-

केवलादेव अभ्यारण्य
केवला देव अभ्यारण्य

–   केवलादेव अभ्यारण्य 19 जुलाई 1983 को स्थापित किया गया | करौली जिले के 676.82 क्षेत्र में फैलाहै 

–   धोकड़ा  के वनों वाले इस अभयारण्य में बगैरा , रीछ,  जरख, सांभर एवं चीतलमिलते हैं  

–  बाघ या से विलुप्त हो गए हैं 

(2.) टाडगढ़ रावली वन्य जीव अभ्यारण्य – tadagarh abhyaran :-  

–  इस अभियान की स्थापना 28 सितंबर 1983 को अजमेर , पाली राजसमंद जिलाके।   475 .24 वर्ग किमी क्षेत्र में की गई है 

–   यहां पर बगैरा ,खरगोश , तेंदुए,  चरक , नीलगाय , एवं गीदड़ मिलतेहैं 

1.नाहरगढ़ अभयारण्य (जयपुर )(naharagadh abhyarany), जमवारामगढ़ अभयारण्य (जयपुर )(jamvaramgadh abhyarany)

2.राजस्थान के अभयारण्य – रामगढ़ विषधारी अभयारण्य( बूंदी)(ramgadh vishadhari abhyarany),सरिस्का अभयारण्य( sariska abhyarany)


3.चौहान वंश के शासक पृथ्वीराज तृतीय(chohan vansh ke shasak prathviraj tratiy)


(3.)   रामसागर अभयारण्य (धौलपुर) – ramsagar abhyaran :-

–   7 नवंबर 1955 को स्थापित किए गए इस अभयारण्य का क्षेत्रफल 30.4 0 वर्ग किमी  है 

–  यहां पर गीदड़ एवं भेड़िए बहुतायत में मिलते हैं 

–  यहां अभयारण्य देशी विदेशी प्रवासी पक्षियों की शरण स्थली है

(4.)  केसरबाघ अभयारण्य (धौलपुर)- kesarbagh abhyaran :-

–   इस अभयारण्य की स्थापना 7 नवंबर 1995 को कुल 14.76 वर्ग किमी क्षेत्र में की गई है यह तेंदुआ , जरख और गीदडो की प्रधानता है 

(5.) सज्जनगढ़ अभयारण्य (उदयपुर) :-

–   सज्जनगढ़ के निकट 5.19 वर्ग किमी क्षेत्र में 17 फरवरी 1987 को स्थापित किया गया है 

–  यहां पर सांभर , चीतल , चिंकारा , नीलगाय एवं जंगली सूअर मिलते हैं

–   उदयपुर से 5 किमी दूर सज्जनगढ़ महल के चारों ओर फैला है सीमा पर पक्की दीवारें हैं 

–  यह 144 प्रजातियां के पक्षी पाए जाते हैं 

(6.)  सवाई मानसिंह अभयारण्य – sawai mansingh abhyaran :-

–  सवाई माधोपुर जिले में 113.07 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य की स्थापना वर्ष 2012 में की गईइसे रणथंबोर में बढ़ते बागों के भविष्य के आश्रय स्थल के रूप मेंविकसित किया गया है

–   राज्य में 33 निषिद्ध क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं जिनका कुल क्षेत्रफल 26719.94 वर्ग किलोमीटर है सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला आखेट निषिद्ध क्षेत्रबीकानेर जिले की श्री डूंगरगढ़ तहसील में स्थित सावंतसर कोटसर है जहां स्तनधारीजीव पाए जाते हैं

1.तराइन का द्धितीय युद्ध और पृथ्वीराज चौहान(tarain ka dvitiy yoddh or prathviraj chohan)\


2.तराइन का प्रथम युद्ध और पृथ्वीराज तृतीय(tarain ka yuddh, prathviraj tratiy)

3.जालौर के चौहान( सोनगरा चौहान ),नाडोल के चौहान(jalor ke chohan)


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